क्या होगा यदि मानव प्रजाति विलुप्त हो जाए?

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मै आपके लिए लेकर आती हूं बहुत ही खास और इंटरेस्टिंग जानकारी जो आपकी नॉलेज के लिए है बेहद इंर्पोटेंट
आज मैं आपके लिए लेकर आई हूं एक खास जानकारी जो
आपके लिए है बेहद जरूरी और इंटरेस्टिंग!

दोस्तो आज हम जानेंग कि क्या इंसान धरती से गायब हो सकता है?

जी हां दोस्तों यही है आज का टॉपिक! और इसके बारे में आज हम विस्तार से बात करेंगे तो आइए जानते हैं:-

क्या होगा यदि मानव प्रजाति विलुप्त हो जाए?


दोस्तों काफी समय पहले के एक पुराने ऑडियो में से ली गई जानकारी है साल 1598 की बात है हिंद महासागर के मॉरीशस द्वीप में एक नाव किनारे की ओर बढ़ रही थी।

नाव से उतरकर कुछ लोगे नया कुछ खोजने की तलाश में
जमीन की तरफ बढ़े और यहां उन्हें कुछ नया नजर आया।

उन्होंने जो खोजा वह एक विशाल पक्षी था जिसकी ऊंचाई थी करीब 1 मीटर उन्होंने इस पंछी को नाम दिया डो डो।

साल दर साल लोगों का यहां आना-जाना जारी रहा और कुछ समय के बाद इस द्वीप की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई।

लोगों ने यहां डोडो की देखभाल करनी शुरू करी और वह लोग डो डो के अंडे भी खाने लगे।

इसके बाद एक सदी से भी कम वक्त में डो डो पक्षी की पूरी प्रजाति खत्म हो गई।

दुनिया के डोडो पक्षी को आखरी बार 1688 में देखा गया।
तब किसी को यकीन नहीं हुआ कि डोडो पक्षी ऐसे दुनिया से हमेशा के लिए लुप्त हो जाएगा।

दोस्तों इसके बाद 150 साल और लगे और तब जाकर यह घोषणा हुई कि डोडो पक्षी का इस धरती पर अब अस्तित्व ही नहीं रहा।

दोस्तों कहने का मतलब यह है कि अब हम पहले के मुकाबले अच्छी तरह से जानने समझने लगे हैं कि धरती से किसी जीव या जंतु का अस्तित्व पूरी तरह से कैसे मिट जाता है।

लेकिन दोस्तों क्या आपने यह भी सोचा है कि कभी ऐसा दिन भी आ सकता है कि जब इस धरती से इंसान पूरी तरह से खत्म हो जाए?

क्या कोई महामारी? या कोई प्रकृति का प्रकोप या फिर इंसान के हाथों विकसित हुई कोई अत्याधुनिक तकनीक मानव जाति के विनाश की वजह बन सकती है।

दोस्तों अब आप बोलेंगे कि मानव जाति बहुत स्मार्ट है!
ऐसे में भला मानव का ऐसा हाल कैसे हो सकता है जैसा डोडो पक्षी का हुआ था।

तो दोस्तों हम यह आप से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इस सदी के खत्म होते होते इंसान का अस्तित्व ही मिट जाए?

क्या होगा यदि मानव प्रजाति विलुप्त हो जाए?


दोस्तों इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए बहुत से विशेषज्ञों ने आपस में बात करी।

पहले विशेषज्ञ साइमन बीएट।

दोस्तों साइमन ब्रिटेन की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं।
उन्होंने इस बात पर काफी शोध किया है कि किन हालातों में पृथ्वी पर जीवन खत्म हो सकता है?

उन्होंने बताया कि हमें यह समझना बहुत जरूरी है कि ऐसा क्या है इस धरती पर जिससे हमें जीवन को बल मिलता है।

हम इंसान इस धरती पर मौजूद तमाम संसाधनों का दोहन कर रहे हैं हम पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर है।

हमारा अस्तित्व ही खत्म हो जाए मानव जाति के लिए इससे बुरा और क्या हो सकता है।

उन्होंने बताया कि अस्तित्व खत्म होने का यह मतलब नहीं है कि पूरी मानव जाति ही नष्ट हो जाएगी क्योंकि  सभ्यताएं पहले भी तो नष्ट होती रही है।

दोस्तों मानव जाति के इतिहास में ऐसे दोर आते रहे हैं  जब मनुष्य पर संकट मंडराया है।

साइमन बीएट ने बताया कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड से यह पता चलता है कि हर हजार साल में कुछ ना कुछ ऐसा हुआ है कि इसकी वजह से लगभग एक तिहाई मानव आबादी नष्ट हो गई।

दोस्तों प्लेग की वजह से (छठी शताब्दी)  में बहुत बड़ी संख्या में लोग मारे गए थें।

76000 साल पहले तो ऐसा भी हो चुका है कि 90% मानव जाति खत्म हो गई थी।

जेनेटिक एविडेंस यह बताते हैं कि धरती पर एक समय ऐसा भी आया था कि कुल मिलाकर करीब 10000 लोग ही पृथ्वी पर बचे थे।

दोस्तों अतीत में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि मानव जाति पूरी तरह से ही इस धरती से खत्म हो गई हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा भविष्य में कभी हो नहीं सकता

बायोइंजीनियरिंग और न्यूक्लियर बम यह कुछ ऐसे खतरे हैं जिनकी लिस्ट साइमन और उनकी टीम ने तैयार की है।

दोस्तों 1940 की दशक में जब दो सुपर पावर अंबिका और सूर्य ध्रुव एक दूसरे को तबाह करने पर उतारू थे तब दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी पर खतरे के बादल मंडरा रहे थे और खतरे के यह बादल आज भी मंडरा रहे हैं।

दोस्तों सबसे बड़ा खतरा यानी  सबसे खराब तस्वीर वह होगी अमेरिका और रूस के बीच न्यूक्लियर वोर होगी।

न्यूक्लियर वोर वैज्ञानिकों के रिसर्च का मुख्य विषय है।
पूरी दुनिया के करीब 90 परसेंट न्यूक्लियर आम्रस परमाणु बम अमेरिका और रूस के पास है।

यह कॉल वोर की विरासत है दोनों के बीच अगर न्यूक्लियर वोर  हुई तो इसके बहुत ही खतरनाक असर देखने को मिल सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूक्लियर वोर से मानव जाति के फौरन नष्ट होने की आशंका कम है लेकिन इसकी वजह से कई शहर बिल्कुल नष्ट हो सकते हैं।

इससे पूरी दुनिया के लिए सप्लाई चेन और इकोनोमी पूरी तरह से गड़बड़ा सकती है इस खतरे की शुरुआत यहीं से होगी

और दूसरा खतरा दोस्तों पर्यावरण से संबंधित समस्याओं की शक्ल में सामने आएगा ऐसी समस्याएं पूरी दुनिया के पर्यावरण में दिखाई देंगी।

न्यूक्लियर बम के धमाकों से पूरी दुनिया के पर्यावरण में धुएं और धूल का विशाल बादल मंडराएंगा।

बादलों की तरह होने की वजह से यह विशाल उबार बारिश से भी नहीं धुलेंगे हो सकता है कि वायुमंडल में इनकी मौजूदगी कई वर्षों तक बनी रहे।

दोस्तों इसकी वजह से सूरज से आने वाली रोशनी भी कुछ हद तक रुक सकती है और दोस्तों सूरज की रोशनी के बिना फसलें नहीं होंगी।

किसी देश में हमले के लिए न्यूक्लियर आर्म्स का इस्तेमाल साल 1945 के बाद आज तक नहीं हुआ है।

तब अमेरिका ने जापान की हिरोसीमा और नागासाकी पर न्यूक्लियर बम बरसाए थे।

दोस्तों उसके बाद भले ही न्यूक्लियर बम से हमला ना हुआ हो लेकिन इसका खतरा लगातार मंडराता रहा है।

दोस्तों साल 1962 में क्यूबा का मिसाइल संकट सामने आया उसके बाद हाल ही के वर्षों में कोरियाई प्रायद्वीप और यूक्रेन पर न्यूक्लियर बम का खतरा लगातार बना रहा।

इन मामलों में यह देखा गया है कि संबंधी देश के नेता न्यूक्लियर बम के इस्तेमाल पर है विचार करते रहे।

दोस्तों न्यूक्लियर वोर बिना किसी योजना के भी शुरू हो सकती है एक गलत अलार्म बजने भर से न्यूक्लियर वोर शुरू हो सकती है।

एक गलत अलार्म न्यूक्लियर वोर के अटैक का मैसेज दे सकता है।

दोस्तों साल 1995 में अमेरिका ने नॉर्मन लाइट्स की स्टडी  के लिए एक रॉकेट रूस की साइड छोड़ा लेकिन रूस ने इसे कुछ और ही समझा।

दोस्तों कहानी यह है कि रूस ने इसे एक संभावित अटैक समझा और राष्ट्रपति येल्ट्सिन को फौरन अलर्ट किया गया।

किस्मत की बात यह थी कि उस रात राष्ट्रपति येलटसिन कम नशे में थे और उन्होंने कहा कि यह कोई अटैक नहीं है
और इसका जवाब देने की कोई जरूरत नहीं है।

दोस्तों अब हम आपको बताएंगे कि न्यूक्लियर वोर की नौबत आने पर क्या आशंका और क्या संभावनाएं हो सकती हैं।

यह सवाल तो बहुत अच्छा है लेकिन इसका जवाब इतना आसान नहीं है इसकी वजह यह है कि ऐसे कोई आंकड़े मौजूद नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूक्लियर वोर मानव जाति के लिए खतरा तो है लेकिन उसके अस्तित्व को खत्म करने के लिए यह खतरा कितना गंभीर हो सकता है इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

दोस्तों कुछ समय पहले हुई रिसर्च में यह बताया गया है कि आज मानव जाति को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा एनर्जी और संसाधनों की जरूरत है।

बढ़ती आबादी और क्लाइमेट चेंज महज संयोग नहीं है।
बढ़ती आबादी के साथ-साथ सुविधाओं का कम होते जाना सिर्फ संयोग नहीं है।

प्रदूषण बढ़ रहा है और यह सभी हम पर अपना असर दिखा रहे हैं विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की बढ़ती आबादी की संख्या अपने आप में कुछ कहती है हम दुनिया की मौजूदा आबादी का ही पेट नहीं भर पा रहे हैं

दोस्तों दुनिया भर में अपना पेट भरने के लिए पेट्रोलियम की अहम भूमिका है नाइट्रोजन वाले फर्टिलाइजेशन के  लिए पेट्रोलियम बहुत जरूरी है

और बंपर पैदावार के लिए नाइट्रोजन वाला खाद बहुत जरूरी है इसलिए खाने की टेबल तक खाना पहुंचता रहे इसके लिए पेट्रोलियम जरूरी है।

दोस्तों बढ़ती आबादी के बुरे असर दुनिया में पहले से ही नजर आ रहे हैं लेकिन क्या बढ़ती आबादी की वजह से यह नौबत भी आ सकती है? कि मानव जाति ही लुप्त हो जाए?

दोस्तों विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी नौबत नहीं आएगी!

दोस्तों तमाम जानकार यह मानते हैं कि धरती पर जीवन में किसी तरह का बदलाव यदि आएगा तो इसके लिए मानव और मानवीए गतिविधियां ही जिम्मेदार होंगी

जिस में शामिल है:-

नंबर 1. क्लाइमेट चेंज।

नंबर 2. न्यूक्लियर वोर।

नंबर 3. टेरेरिस्ट अटैक।

नंबर 4. बढ़ती आबादी

नंबर 5. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।

दोस्तों आशा करती हूं आज की जानकारी आपको पसंद आई होगी ऐसी ही इंटरेस्टिंग जानकारी पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट पर आए।

आज के लिए बस इतना ही मिलते हैं एक और महत्वपूर्ण जानकारी के साथ तब तक अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें अपने चारों तरफ सफाई बनाए रखें धन्यवाद।

 आपकी दोस्त पुष्पा डाबोदिया।।

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