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ऐसी ही महत्वपूर्ण और इंटरेस्टिंग जानकारी लेकर आज मैं फिर हाजिर हूं। दोस्तों हमारा आज का टॉपिक है।
क्षुद्र ग्रह धरती से टकराए तो क्या होगा?
दोस्तों! वैसे तो धरती के जन्म से ही हमारी धरती पर क्षुद्र ग्रह का हमला होता आ रहा है।
लेकिन हमें शुक्रिया करना चाहिए हमारी वायुमंडल का जिसने कई सदियों से इन एस्टेरॉयड के हमले से हमारी धरती और हमें बचाए रखा है।
यह क्षुद्र ग्रह हमारी धरती की ओर आते तो है लेकिन धरती के वायुमंडल में विलीन हो जाते हैं।
हमें तो जरा सी भी भनक नहीं लगती कि हमारा वायु मंडल हमें ऐसे छोटे बड़े एसटैरोयड के हमले से हमें बचाता रहता है।
लेकिन दोस्तों क्या आपने कभी यह सोचा है कि यह एस्टेरोयड धरती के वायुमंडल को चीरता हुआ धरती की सतह तक आ गिरे तो क्या होगा?
क्या आपने कभी यह सोचा है कि फुटबॉल ग्राउंड के जैसा यह एस्टेरॉयड कभी हमारी धरती पर आ गिरे तो क्या आपने सोचा है कि कितना नुकसान होगा, इतनी तबाही मचेगी और कितना डरावना होगा वह नजारा।
दोस्तों एस्टेरोयड हमारी धरती से टकराता रहता है। हर रोज हमारी ओर सौ टन से भी ज्यादा की तादात में रेत और धूल की बौछार करता है। लेकिन दोस्तों यह हमारे वायुमंडल की तेज वेग में जल कर भस्ममें हो जाते हैं और कभी भी धरती की सतह तक नहीं पहुंच पाते।
सिर्फ यही नहीं 10 किलोमीटर चौड़ाई का एक विशाल चट्टान ठीक वैसा ही जैसा कि 65 मिलीयन सालों पहले धरती से डायनासोर का नामोनिशान मिटा दिया था।
ऐसा ही एस्टरोयड मिलियन सालों में एक बार धरती का रुख जरूर करता है लेकिन खुशकिस्मती से यह भी हमारे वायुमंडल में ही भस्म हो जाता है।
लेकिन इसके अलावा भी उल्कापिंड जो किसी फुटबॉल ग्राउंड के साइज का हो उससे हमें डरने की जरूरत है ,क्योंकि यह हमारी धरती की सतह तक कभी ना कभी तो जरूर पहुंच सकता है।
और यह हर 2000 सालों में धरती की और आता है।
जरा सोचिए अगर इन सब उलका पिंडों में से कोई उल्का पिंड धरती से टकरा जाए तो क्या होगा?
उल्का पिंडों के टकराव से धरती की सतह उथल-पुथल हो जाएगी। वैसे तो धरती की सतह का सिर्फ 3% हिस्सा ही आबादी वाला है इसका मतलब यह है कि 100 एस्टेरोइड धरती से टकराऐ तो उनमें से 97 एस्टोरोयड या तो समुंद्र में या फिर बिना आबादी वाले घने जंगलों में जा गिरेंगे।
जैसे की साइबेरिया या नॉर्दनकेनेडा के घने जंगलों में।
दोस्तों हम कल्पना करें कि 100 किलोमीटर लम्बा एस्टेरॉयड 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हमारी ओर आ रहा हो और जैसे ही यह हमारी सुरक्षा घेरे से गुजर जाए तो इसे पृथ्वी की सतह से टकराने मात्र 3 सेकंड का ही समय लगेगा।
जिस जगह यह आग का गोला टकराएगा उस से 3 किलोमीटर तक के एरिया में मौजूद हर चीज तबाह हो जाएगी।
साल 2013 में रुसिया के चेल्याबिंस्क शहर में एक उल्का पिंड आ गिरा था। जिसकी क्षमता हिरोशिमा में हुये परमाणु हमले से 20 गुना ज्यादा थी।
और इस हमले में 33 मिलीयन कीमत डॉलर का नुकसान हुआ था। लेकिन हम बात कर रहे हैं उससे भी 5 गुना बड़े उल्कापिंड की जो अगर हमारी धरती से टकराए तो सोचो कितनी तबाही होगी।
इन उल्का पिंडों के टकराव से सबसे बड़ा खतरा रेडिएशन का हो सकता है। अगर यह उल्कापिंड रेडियोएक्टिव मैटल के बने हो तो।
रेडियोएक्टिव मैटल के बने यह उल्कापिंड किसी भी 10 किलो मीटर चौड़ाई वाले उल्का पिंड से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं।
इन उल्का पिंडों के टकराव से इतना घातक धमाका उत्पन्न होगा कि वहां पर मौजूद इंसानी सभ्यता का नामोनिशान मिटा देगा।
जिस जगह यह एस्ट्रोयड गिरेगा वहां 100 किलोमीटर चौड़े खड्डे का निर्माण करेगा। और इन एस्ट्रोयड के छोटे-छोटे टुकड़े किसी रिंग की तरह धरती के चारों तरफ चक्कर लगाएंगे।
जिससे धरती भी कुछ हद तक सटन जैसी दिखेगी।
एस्ट्रॉयड की टक्कर से धरती की सतह धूल और धुएं से ढक जाएगी। इन सब से बचने के लिए एक ही उपाय है कि
हमें जमीन के अंदर अंडर ग्राउंड रहने की जगह बना ले तो शायद हम बच सकते हैं।
और यह धूल इतनी खतरनाक होगी कि सूर्य की रोशनी को भी धरती तक पहुंचने से रोक देगा और फिर बिना सूरज की रोशनी के सारे पेड़ पौधे और जानवर खत्म हो जाएंगे।
दोस्तों यह थी आपके लिए कुछ खास जानकारी उम्मीद करती हूं आपको पसंद आई होगी। आज के इस लेख के बारे में आपका क्या ख्याल है हमें जरूर बताएं। धन्यवाद
दोस्तों आज के लेख में बस इतना ही।
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मैं लेकर आती हूं आपके लिए अच्छी-अच्छी जानकारी जो आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
तो मिलते हैं ऐसी ही एक और नई जानकारी के साथ तब तक के लिए अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें अपने चारों तरफ सफाई का विशेष ध्यान रखें।
दोस्तों आजकल मच्छर बहुत ज्यादा हो गए हैं। बीमारियां बहुत तेजी से फैल रही है। इसलिए अपने बच्चों और बड़ों का ख्याल रखें।
धन्यवाद।
आपकी दोस्त पुष्पा डाबोदिया।
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